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सोमवार, 5 अगस्त 2013

ए.आई.आर. 2007 सुप्रीम कोर्ट 71 एम. नागराज विरूद्ध भारतसंघ

1-        ए.आई.आर. 2007 सुप्रीम कोर्ट 71 एम. नागराज विरूद्ध भारतसंघ के मामले में 5 जजों की खण्डपीठ में इन्टरपुटेषन पर सिद्धांत अभिनिर्धारित किया है और मूल अधिकारों के संबंध में अभि निर्धारित किया है कि अधिाकर के साथ ही साथ उसको प्रदान किये जाने संबंधी प्रावधान भी दिये गये हैं और प्रस्तावना संविधान का भाग है । संविधान संषोधन की व्याख्या की जा सकती है जो मूल अधिकारों के विपरीत होने से अपास्त की जा सकती है और आरक्षण के बिन्दु पर चर्चा की गई है ।

2-        ए.आई.आर. 2007 सुप्रीम कोर्ट 861में 10 जजों की खण्डपीठ में संविधान की व्याख्या करते हुये अभिनिर्धारित कियाहै कि अनुच्छेद 32 के अंतर्गत न्यायिक पुनर्विलोपन संवैधानिक संविधान के मूल ढाचें में और इसलिए अनुच्छेद 32 में किसी प्रकार का प्रावधान कोई भी कानून नहीं किया जा सकता है। अनुच्छेद 14,19,26 में संसद के द्वारा भी उनके बेसिक संरचना को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है ।



4-        ए.आई.आर. 2008 सुप्रीम कोर्ट 23,37 रजिस्ट्ीकरण अधिनियम की धारा-17-2-4 से संबंधित है । समझौता डिक्री से स्वत्व का अंतरण हुआ है  और कब्जा दिया जा रहा है तो उसका रजिस्ट्ेषन----

5-        ए.आई.आर. 2006 सुप्रीम कोर्ट 272 में 10 जजों की खण्ड पीठ में मामला अधिकार एंव निधिनिर्देषक तत्वों आर्टिकल 19 व 37 में अंतर को समझाया है जिसके अंतर्गत गाय के वध किये जाने वाले संेटर हाउस को पूर्णतः बंद नहीं किया जा सकता है केवल उन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है ।

6-        ए.आई.आर. 2004 सुप्रीम कोर्ट 3366 साक्षी विरूद्ध स्वदेष के मामले में धारा7375, 376, 377, 354 यौन प्रताडना संबंधी मामले में साक्ष्य अभिलिखित किये जाने संबंधी विधि दर्षाई गई है और बलात्कार      किया गया है तो ऐसे मामले जिसमें कि प्रार्थी अवयस्क है और वह आरोपी से डरती है तो उसे पर्दे की आड में रखकर साक्ष्य अभिलिखित किये जाने तथा केमरा ट्ायल संबंधी सिद्धांत अभिनिर्धारित किया गया है ।

7-        ए.आई.आर. 1977 सुप्रीम कोर्ट 166 में 5 जजों की खण्ड पीठ में स्टेट डीकोराइजेष 1956 की धारा- 91-2 की व्याख्या की है जिसमें राज्य पुनर्गइन को अब्दुल तैयब विरूद्ध भारतसंघ के मामले मे वेधानिक ठहराया है ।

8-        ए.आई.आर. 2003 मध्य प्रदेष सरकार मानव अधिकार आयोग विरूद्ध मध्य प्रदेषषासन जिसमें ब्लांइड लोगो की सुविधा हेतु मध्य प्रदेषषासन को निर्देषित किया गया है ।

9-        ए.आई.आर. 2008 सुप्रीम कोर्ट 142 नर्बदा विरूद्ध स्टेट आफ मध्य प्रदेषषासन के मामले में भू अधि- के पालन में मान्यता दी गई है जिसमजें ओमकेषवर बांध के गु्रप में आये क्षेत्र के निवासियों ने आपत्ति प्रस्तुत की है ।

10-        ए.आई.आर. 2009 मध्य प्रदेषषासन 153 पूरण ंिसंह विरूद्ध मध्य प्रदेषषासन के मामले में अवैधानिक रूप से जेल में बंद व्यक्तियों को षासन द्वारा प्रतिकर दिये जाने के निर्देष दिये गये हैं ।

11-        ए.आई.आर. 2009 मध्य प्रदेषषासन 229 के मामले में इन्दौर नगर पालिका के पानी सप्लाई के लिएउचित मात्रा में सप्लाई के निर्देष दिये जा सकते हैं । अज्ञात्मक रूप से पानी की व्यवस्था न होने की दषा में सम्पूर्ण नगर पालिका कठोरता के द्वारा पानी सप्लाई के निर्देष दिये जा सकते हैं

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